• क्या आप भी इस बात से सहमत हो .........?
    क्या आप भी इस बात से सहमत हो .........?
    Like
    Love
    2
    0 Yorumlar 0 hisse senetleri 101 Views 0 önizleme
  • समुद्र में उतर गए तो किनारा भी आएगा,,आज वक्त तुम्हारा है कल हमारा भी आएगा
    समुद्र में उतर गए तो किनारा भी आएगा,,आज वक्त तुम्हारा है कल हमारा भी आएगा
    0 Yorumlar 0 hisse senetleri 471 Views 28 0 önizleme
  • पहली गलती पर सर काटने की शक्ति होने बाद भी यदि 99 और गलती सहने का 'सामर्थ्य' है, तो वो कृष्ण हैं।
    सुदर्शन' जैसा शस्त्र होने के बाद भी यदि हाथ में हमेशा 'मुरली' है, तो वो कृष्ण हैं।
    द्वारिका' का वैभव होने के बाद भी यदि 'सुदामा' मित्र है, तो वो कृष्ण हैं।
    मृत्यु' के फन पर मौजूद होने पर भी यदि 'नृत्य' है, तो वो कृष्ण हैं ।
    सर्वसामर्थ्य' होने पर भी यदि सारथी' बने हैं तो वो कृष्ण हैं ।
    श्री कृष्ण के अवतरण दिवस पर जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं और कोटि कोटि बधाई।
    पहली गलती पर सर काटने की शक्ति होने बाद भी यदि 99 और गलती सहने का 'सामर्थ्य' है, तो वो कृष्ण हैं। सुदर्शन' जैसा शस्त्र होने के बाद भी यदि हाथ में हमेशा 'मुरली' है, तो वो कृष्ण हैं। द्वारिका' का वैभव होने के बाद भी यदि 'सुदामा' मित्र है, तो वो कृष्ण हैं। मृत्यु' के फन पर मौजूद होने पर भी यदि 'नृत्य' है, तो वो कृष्ण हैं । सर्वसामर्थ्य' होने पर भी यदि सारथी' बने हैं तो वो कृष्ण हैं । श्री कृष्ण के अवतरण दिवस पर जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं और कोटि कोटि बधाई।
    Like
    1
    0 Yorumlar 0 hisse senetleri 562 Views 0 önizleme
  • उनासीवे स्वतंत्रता दिवस के पावन पर्व पर आप सबको हार्दिक बधाई एवं मंगलमय शुभकामनाएँ ।

    यह पावन दिवस अनेकों बलिदानियों, क्रांतिकारियों तथा स्वतंत्रता सेनानियों के सतत् संघर्ष के परिणामस्वरूप सुलभ हो पाया है, इन सभी के चरणों में सादर नमन । सभी पुण्यात्माओं का पावन स्मरण करते हुए हम अपने राष्ट्रीय कर्तव्यों की पालना सुनिश्चित करें तथा राष्ट्रीय हितों के लिए सदैव सन्नद्ध रहें ।

    जय हिंद, जय भारत
    Shiva Kirar
    Founder & CEO
    talkfever
    उनासीवे स्वतंत्रता दिवस के पावन पर्व पर आप सबको हार्दिक बधाई एवं मंगलमय शुभकामनाएँ । यह पावन दिवस अनेकों बलिदानियों, क्रांतिकारियों तथा स्वतंत्रता सेनानियों के सतत् संघर्ष के परिणामस्वरूप सुलभ हो पाया है, इन सभी के चरणों में सादर नमन । सभी पुण्यात्माओं का पावन स्मरण करते हुए हम अपने राष्ट्रीय कर्तव्यों की पालना सुनिश्चित करें तथा राष्ट्रीय हितों के लिए सदैव सन्नद्ध रहें । जय हिंद, जय भारत Shiva Kirar Founder & CEO talkfever
    Like
    1
    0 Yorumlar 0 hisse senetleri 1K Views 0 önizleme
  • मुझ पर दोस्तों का प्यार,
    यूँ ही उधार रहने दो |
    बड़ा हसीन है, ये कर्ज,
    मुझे कर्ज़दार रहने दो ||

    वो आँखें जो छलकती हैं,
    ग़म में, ख़ुशी में, मेरे लिए |
    उन सभी आँखों में सदा,
    प्यार बेशुमार रहने दो ||

    मौसम लाख बदलते रहें,
    आएँ भले बसंत-पतझड़ |
    मेरे यारों को जीवन भर,
    यूँ ही सदाबहार रहने दो ||

    महज दोस्ती नहीं ये,
    बगिया है विश्वास की |
    प्यार, स्नेह के फूलों से,
    इसे गुलज़ार रहने दो ||

    वो मस्ती, वो शरारतें,
    न तुम भूलों, न हम भूलें |
    उम्र बढ़ती है..खूब बढ़े,
    *जवाँ ये किरदार रहने दो

    -------------
    🙏 अंतरराष्ट्रीय मित्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏
    मुझ पर दोस्तों का प्यार, यूँ ही उधार रहने दो | बड़ा हसीन है, ये कर्ज, मुझे कर्ज़दार रहने दो || वो आँखें जो छलकती हैं, ग़म में, ख़ुशी में, मेरे लिए | उन सभी आँखों में सदा, प्यार बेशुमार रहने दो || मौसम लाख बदलते रहें, आएँ भले बसंत-पतझड़ | मेरे यारों को जीवन भर, यूँ ही सदाबहार रहने दो || महज दोस्ती नहीं ये, बगिया है विश्वास की | प्यार, स्नेह के फूलों से, इसे गुलज़ार रहने दो || वो मस्ती, वो शरारतें, न तुम भूलों, न हम भूलें | उम्र बढ़ती है..खूब बढ़े, *जवाँ ये किरदार रहने दो ------------- 🙏 अंतरराष्ट्रीय मित्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏
    Like
    Love
    2
    0 Yorumlar 0 hisse senetleri 2K Views 0 önizleme
  • हमें तो अपनो ने लूटा गैरों में कहाँ दम था

    मेरी कश्ती भी वहाँ डूबी जहाँ पानी ही कम था

    लूट कर हमको पाया भी क्या था

    मेरे पास तो लूटने के लिये बस यादों का समंदर था

    मेरी कश्ती भी पहुची थे किनारे तक

    साहिलों के पास तो रास्ते का न मंजर था

    बहुत भटके थे मंजिल तक पहुचने के लिये

    पर रास्तों पर लिखा था इधर का रास्ता ही बंद था

    है अजीब सी फितरत हमारी भी दोस्तों

    हम गुजरे उन्ही राहों पर जहां काटों का दामन था।
    हमें तो अपनो ने लूटा गैरों में कहाँ दम था मेरी कश्ती भी वहाँ डूबी जहाँ पानी ही कम था लूट कर हमको पाया भी क्या था मेरे पास तो लूटने के लिये बस यादों का समंदर था मेरी कश्ती भी पहुची थे किनारे तक साहिलों के पास तो रास्ते का न मंजर था बहुत भटके थे मंजिल तक पहुचने के लिये पर रास्तों पर लिखा था इधर का रास्ता ही बंद था है अजीब सी फितरत हमारी भी दोस्तों हम गुजरे उन्ही राहों पर जहां काटों का दामन था।
    Like
    1
    0 Yorumlar 0 hisse senetleri 320 Views 0 önizleme
  • 🌴🌴🌴🇮🇳🌲🌲🏞️समस्त विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ!

    प्रकृति हमारी माता है, इसलिए उज्ज्वल भविष्य और उत्तम स्वास्थ्य के लिए उसका संरक्षण हम सभी का परम कर्तव्य है।

    पौधारोपण करें, वृक्षों की देखभाल करें और दूसरों को भी इस पुण्य कार्य के लिए प्रेरित करें, ताकि हमारे साथ-साथ आने वाली पीढ़ियाँ भी एक स्वस्थ, समृद्ध और सुंदर जीवन का उपहार पा सकें।🌴🌴🌲🌲⛰️🏞️🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
    🌴🌴🌴🇮🇳🌲🌲🏞️समस्त विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ! प्रकृति हमारी माता है, इसलिए उज्ज्वल भविष्य और उत्तम स्वास्थ्य के लिए उसका संरक्षण हम सभी का परम कर्तव्य है। पौधारोपण करें, वृक्षों की देखभाल करें और दूसरों को भी इस पुण्य कार्य के लिए प्रेरित करें, ताकि हमारे साथ-साथ आने वाली पीढ़ियाँ भी एक स्वस्थ, समृद्ध और सुंदर जीवन का उपहार पा सकें।🌴🌴🌲🌲⛰️🏞️🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
    0 Yorumlar 0 hisse senetleri 405 Views 0 önizleme
  • 🌹🌹🌹बात अगर हमारे आत्म सम्मान की आ गई मोहतरमा तो तुम्हें वहां से भी उठा लेंगे जहां की रानी तुम🌹🌹🌹
    🌹🌹🌹बात अगर हमारे आत्म सम्मान की आ गई मोहतरमा तो तुम्हें वहां से भी उठा लेंगे जहां की रानी तुम🌹🌹🌹
    0 Yorumlar 0 hisse senetleri 600 Views 7 0 önizleme
  • विवाह का संकट

    तुम्हारी शादी नहीं हो सकती क्योंकि तुम मांगलिक हो! मनोज जी की कड़क आवाज़ ने पूरे कमरे में सन्नाटा फैला दिया। वैशाली की आंखों में आंसू थे लेकिन उसने अपनी आवाज़ को मजबूत रखते हुए कहा मैंने क्या किया है?
    इंदौर के एक छोटे से मोहल्ले में एक साधारण से घर के बाहर एक कार खड़ी थी। अंदर 29 साल की वैशाली साड़ी पहने झुकी हुई पलकों के साथ बैठी थी। उसके चारों ओर रिश्तेदारों की भीड़ थी जो उसकी शादी की चर्चा कर रहे थे। सामने बैठा लड़का विपिन जी का बेटा बारबार उसे चोर नज़रों से देख रहा था लेकिन वैशाली ने एक बार भी अपनी आंखें नहीं उठाईं। उसकी मां अदिति जी सामने बैठी महिला से कह रही थीं तो हम ये रिश्ता पक्का समझें।
    तभी मनोज जी ने अपनी तेज आवाज़ में कहा हमारे घर में लड़कियां फैसला नहीं लेतीं। वैशाली की आंखों में नमी आ गई। विपिन जी ने मुस्कुराते हुए कहा आपने तो अच्छे संस्कार दिए हैं अपनी बेटी को। अदिति जी ने गर्व से कहा बहुत संस्कारी है मेरी बेटी आपको कभी शिकायत का मौका नहीं देगी। वैशाली ने मन में सोचा बहु बहु ही क्यों? कोई बेटी क्यों नहीं? तभी उसकी मां ने उसे मिठाई की प्लेट पकड़ाते हुए कहा चलो सबका मुंह मीठा करवाओ।
    जैसे ही वैशाली ने मिठाई की प्लेट लड़के के पास बढ़ाई उसने उसके हाथ को छू लिया। वैशाली ने उसे देखा और उसकी आंखों में आंसू आ गए। लड़के की मां ने कहा हम आपकी बेटी को बहुत पसंद करते हैं। अदिति जी ने उन्हें विदा किया लेकिन जैसे ही वे चले गए मनोज जी ने वैशाली को घूरते हुए कहा इस लड़की से बोल दो इतनी मुश्किल से कोई लड़का तैयार हुआ है जो पंडित जी जो रस्म बताए शांति से कर दे।
    अदिति जी ने सिर हिलाया लेकिन वैशाली के मन में एक तूफान चल रहा था। क्या वह सच में इस रिश्ते के लिए तैयार थी? तभी फोन की घंटी बजी और अदिति जी की आवाज़ सुनकर
    विवाह का संकट तुम्हारी शादी नहीं हो सकती क्योंकि तुम मांगलिक हो! मनोज जी की कड़क आवाज़ ने पूरे कमरे में सन्नाटा फैला दिया। वैशाली की आंखों में आंसू थे लेकिन उसने अपनी आवाज़ को मजबूत रखते हुए कहा मैंने क्या किया है? इंदौर के एक छोटे से मोहल्ले में एक साधारण से घर के बाहर एक कार खड़ी थी। अंदर 29 साल की वैशाली साड़ी पहने झुकी हुई पलकों के साथ बैठी थी। उसके चारों ओर रिश्तेदारों की भीड़ थी जो उसकी शादी की चर्चा कर रहे थे। सामने बैठा लड़का विपिन जी का बेटा बारबार उसे चोर नज़रों से देख रहा था लेकिन वैशाली ने एक बार भी अपनी आंखें नहीं उठाईं। उसकी मां अदिति जी सामने बैठी महिला से कह रही थीं तो हम ये रिश्ता पक्का समझें। तभी मनोज जी ने अपनी तेज आवाज़ में कहा हमारे घर में लड़कियां फैसला नहीं लेतीं। वैशाली की आंखों में नमी आ गई। विपिन जी ने मुस्कुराते हुए कहा आपने तो अच्छे संस्कार दिए हैं अपनी बेटी को। अदिति जी ने गर्व से कहा बहुत संस्कारी है मेरी बेटी आपको कभी शिकायत का मौका नहीं देगी। वैशाली ने मन में सोचा बहु बहु ही क्यों? कोई बेटी क्यों नहीं? तभी उसकी मां ने उसे मिठाई की प्लेट पकड़ाते हुए कहा चलो सबका मुंह मीठा करवाओ। जैसे ही वैशाली ने मिठाई की प्लेट लड़के के पास बढ़ाई उसने उसके हाथ को छू लिया। वैशाली ने उसे देखा और उसकी आंखों में आंसू आ गए। लड़के की मां ने कहा हम आपकी बेटी को बहुत पसंद करते हैं। अदिति जी ने उन्हें विदा किया लेकिन जैसे ही वे चले गए मनोज जी ने वैशाली को घूरते हुए कहा इस लड़की से बोल दो इतनी मुश्किल से कोई लड़का तैयार हुआ है जो पंडित जी जो रस्म बताए शांति से कर दे। अदिति जी ने सिर हिलाया लेकिन वैशाली के मन में एक तूफान चल रहा था। क्या वह सच में इस रिश्ते के लिए तैयार थी? तभी फोन की घंटी बजी और अदिति जी की आवाज़ सुनकर
    0 Yorumlar 0 hisse senetleri 585 Views 0 önizleme
  • गुजरात के अहमदाबाद में एअर इंडिया का प्लेन क्रैश हुआ है। Anil dulait 💞 टेकऑफ के 2 मिनट बाद ही फ्लाइट एक बिल्डिंग से टकरा गई। इसके बाद प्लेन में आग लग गई। विमान में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रुपाणी सहित 242 लोगो मे से 140 लोगो की मौके पर ही मौत हो गई😭😭विमान के शतिग्रस्त की खबर अत्यंत दुर्भाग्यजनक एवं हृदय विदारक है। 😢😥
    मैं ईश्वर से अकाल मृत्यु को प्राप्त हुए समस्त नागरिकों की आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना करता हूं। घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ मिले। ईश्वर परिजनों को यह आघात सहन करने का सामर्थ्य प्रदान करें।
    ॐ शांति!😔
    गुजरात के अहमदाबाद में एअर इंडिया का प्लेन क्रैश हुआ है। Anil dulait 💞 टेकऑफ के 2 मिनट बाद ही फ्लाइट एक बिल्डिंग से टकरा गई। इसके बाद प्लेन में आग लग गई। विमान में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रुपाणी सहित 242 लोगो मे से 140 लोगो की मौके पर ही मौत हो गई😭😭विमान के शतिग्रस्त की खबर अत्यंत दुर्भाग्यजनक एवं हृदय विदारक है। 😢😥 मैं ईश्वर से अकाल मृत्यु को प्राप्त हुए समस्त नागरिकों की आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना करता हूं। घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ मिले। ईश्वर परिजनों को यह आघात सहन करने का सामर्थ्य प्रदान करें। ॐ शांति!😔
    Like
    1
    1 Yorumlar 0 hisse senetleri 615 Views 0 önizleme
  • अहमदाबाद में एयर इंडिया के प्लान क्रैश हादसे में मरने वाले यात्रियों के प्रति गहरी शोक संवेदनाएं और घायलों के शीग्रतिशीघ्र स्वस्थ होने की समस्त टॉकफीवर परिवार की ओर ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ |

    सभी मृतक यात्रियों को ईश्वर अपने श्री चरणों में स्थान दे और परिवारजनों को गहरे दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करे |

    ॐ शांति ॐ शांति ॐ शांति
    अहमदाबाद में एयर इंडिया के प्लान क्रैश हादसे में मरने वाले यात्रियों के प्रति गहरी शोक संवेदनाएं और घायलों के शीग्रतिशीघ्र स्वस्थ होने की समस्त टॉकफीवर परिवार की ओर ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ | सभी मृतक यात्रियों को ईश्वर अपने श्री चरणों में स्थान दे और परिवारजनों को गहरे दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करे | ॐ शांति ॐ शांति ॐ शांति
    Like
    Sad
    2
    0 Yorumlar 0 hisse senetleri 1K Views 0 önizleme
  • *भगवान का वास्तविक अर्थ क्या है?*

    "भगवान" शब्द में छिपा है प्रकृति का सार — भू (पृथ्वी), गगन (आकाश), वायु, अग्नि और नीर (जल)। यही पंचमहाभूत हैं, जो इस ब्रह्मांड और हमारे अस्तित्व की आधारशिला हैं। अतः भगवान अर्थात ये पांच तत्व, और इन्हीं का दूसरा नाम है प्रकृति।

    हमारा शरीर भी इन्हीं पंचतत्वों से निर्मित है। इसलिए, स्वस्थ शरीर ही ईश्वर की सच्ची पूजा और उसका सम्मान है — क्योंकि उस शरीर में आत्मा रूपी चेतना स्वयं विराजमान रहती है।

    *क्यों आवश्यक है आयुर्वेद?*

    यदि हमारा शरीर स्टील, सीमेंट या केमिकल से बना होता, तो रासायनिक दवाएँ उपयुक्त होतीं। परन्तु हमारा शरीर प्राकृतिक तत्वों से बना है, इसलिए इसकी देखभाल भी प्राकृतिक उपायों — विशेषतः आयुर्वेद — से ही होनी चाहिए।

    *हमारा शरीर और पंचतत्व का संबंध:*

    भू (पृथ्वी): शरीर की हड्डियाँ, मांसपेशियाँ और त्वचा — सभी का मूल आधार मिट्टी है।

    नीर (जल): हमारे शरीर में 70% से अधिक जल है, ठीक वैसे ही जैसे पृथ्वी का भी अधिकांश भाग जल से आच्छादित है।

    वायु: श्वास द्वारा जीवन चलता है। वायु के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती।

    अग्नि: पाचन क्रिया में पेट की अग्नि महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब तक शरीर में यह ऊष्मा रहती है, तब तक वह जीवित है।

    गगन (आकाश): शरीर में सूक्ष्म स्थान, विचारों की गति, और चेतना का प्रवाह इसी आकाश तत्व के कारण संभव है।

    *पंचतत्व से ही उपचार संभव क्यों है?*

    इन तत्वों के संतुलन से ही हमारा शरीर स्वस्थ रह सकता है। जब हम प्रकृति के समीप होते हैं — पर्वतों, नदियों, अग्नि (सूर्य) के प्रकाश के पास — तो हम अधिक प्रसन्न और ऊर्जावान महसूस करते हैं। इसका कारण यही पंचतत्व हैं, जिनसे हमारा संपर्क गहरा होता है।

    *पौधे — पंचतत्व का जीवंत रूप:*

    पौधे मिट्टी में उगते हैं, जल से सिंचित होते हैं, सूर्य (अग्नि) से ऊर्जा लेते हैं, वायु से श्वास और आकाश में विस्तारित होते हैं। यही कारण है कि आयुर्वेद — जो जड़ी-बूटियों पर आधारित है — हमारे शरीर को पूर्ण रूप से संतुलित और स्वस्थ रखने की क्षमता रखता है।

    *निष्कर्ष:*
    हमारा शरीर पंचतत्वों से बना है और उसे स्वस्थ रखने के लिए हमें उन्हीं तत्वों से उपचार लेना चाहिए। आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली इस प्राकृतिक संतुलन को पुनर्स्थापित करती है। इसलिए, आयुर्वेद मात्र एक चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि जीवन के साथ जुड़ने का एक प्राकृतिक और दिव्य माध्यम है.
    *भगवान का वास्तविक अर्थ क्या है?* "भगवान" शब्द में छिपा है प्रकृति का सार — भू (पृथ्वी), गगन (आकाश), वायु, अग्नि और नीर (जल)। यही पंचमहाभूत हैं, जो इस ब्रह्मांड और हमारे अस्तित्व की आधारशिला हैं। अतः भगवान अर्थात ये पांच तत्व, और इन्हीं का दूसरा नाम है प्रकृति। हमारा शरीर भी इन्हीं पंचतत्वों से निर्मित है। इसलिए, स्वस्थ शरीर ही ईश्वर की सच्ची पूजा और उसका सम्मान है — क्योंकि उस शरीर में आत्मा रूपी चेतना स्वयं विराजमान रहती है। *क्यों आवश्यक है आयुर्वेद?* यदि हमारा शरीर स्टील, सीमेंट या केमिकल से बना होता, तो रासायनिक दवाएँ उपयुक्त होतीं। परन्तु हमारा शरीर प्राकृतिक तत्वों से बना है, इसलिए इसकी देखभाल भी प्राकृतिक उपायों — विशेषतः आयुर्वेद — से ही होनी चाहिए। *हमारा शरीर और पंचतत्व का संबंध:* भू (पृथ्वी): शरीर की हड्डियाँ, मांसपेशियाँ और त्वचा — सभी का मूल आधार मिट्टी है। नीर (जल): हमारे शरीर में 70% से अधिक जल है, ठीक वैसे ही जैसे पृथ्वी का भी अधिकांश भाग जल से आच्छादित है। वायु: श्वास द्वारा जीवन चलता है। वायु के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। अग्नि: पाचन क्रिया में पेट की अग्नि महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब तक शरीर में यह ऊष्मा रहती है, तब तक वह जीवित है। गगन (आकाश): शरीर में सूक्ष्म स्थान, विचारों की गति, और चेतना का प्रवाह इसी आकाश तत्व के कारण संभव है। *पंचतत्व से ही उपचार संभव क्यों है?* इन तत्वों के संतुलन से ही हमारा शरीर स्वस्थ रह सकता है। जब हम प्रकृति के समीप होते हैं — पर्वतों, नदियों, अग्नि (सूर्य) के प्रकाश के पास — तो हम अधिक प्रसन्न और ऊर्जावान महसूस करते हैं। इसका कारण यही पंचतत्व हैं, जिनसे हमारा संपर्क गहरा होता है। *पौधे — पंचतत्व का जीवंत रूप:* पौधे मिट्टी में उगते हैं, जल से सिंचित होते हैं, सूर्य (अग्नि) से ऊर्जा लेते हैं, वायु से श्वास और आकाश में विस्तारित होते हैं। यही कारण है कि आयुर्वेद — जो जड़ी-बूटियों पर आधारित है — हमारे शरीर को पूर्ण रूप से संतुलित और स्वस्थ रखने की क्षमता रखता है। *निष्कर्ष:* हमारा शरीर पंचतत्वों से बना है और उसे स्वस्थ रखने के लिए हमें उन्हीं तत्वों से उपचार लेना चाहिए। आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली इस प्राकृतिक संतुलन को पुनर्स्थापित करती है। इसलिए, आयुर्वेद मात्र एक चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि जीवन के साथ जुड़ने का एक प्राकृतिक और दिव्य माध्यम है.
    Love
    1
    0 Yorumlar 0 hisse senetleri 581 Views 0 önizleme
Arama Sonuçları
Sponsorluk
Talkfever - A Global Social Network https://willing-aqua-chinchilla.88-222-213-151.cpanel.site/