हमें तो अपनो ने लूटा गैरों में कहाँ दम था

मेरी कश्ती भी वहाँ डूबी जहाँ पानी ही कम था

लूट कर हमको पाया भी क्या था

मेरे पास तो लूटने के लिये बस यादों का समंदर था

मेरी कश्ती भी पहुची थे किनारे तक

साहिलों के पास तो रास्ते का न मंजर था

बहुत भटके थे मंजिल तक पहुचने के लिये

पर रास्तों पर लिखा था इधर का रास्ता ही बंद था

है अजीब सी फितरत हमारी भी दोस्तों

हम गुजरे उन्ही राहों पर जहां काटों का दामन था।
हमें तो अपनो ने लूटा गैरों में कहाँ दम था मेरी कश्ती भी वहाँ डूबी जहाँ पानी ही कम था लूट कर हमको पाया भी क्या था मेरे पास तो लूटने के लिये बस यादों का समंदर था मेरी कश्ती भी पहुची थे किनारे तक साहिलों के पास तो रास्ते का न मंजर था बहुत भटके थे मंजिल तक पहुचने के लिये पर रास्तों पर लिखा था इधर का रास्ता ही बंद था है अजीब सी फितरत हमारी भी दोस्तों हम गुजरे उन्ही राहों पर जहां काटों का दामन था।
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